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हजरत कुतबे आलम ,गंगोह,सहारनपुर.

हजरत कुतबे आलम ,गंगोह,सहारनपुर. गंगोह नगर महाराजा गंग ने बसाया था। इस पावन भूमि पर हजरत कुतुब-ए-आलम ने भी यहीं लोगों को ज्ञान का संदेश दिया। ... गंगोह नगर के पश्चिम में हजरत कुतुब-ए-आलम प्रहरी हैं। जहां आज मजार है वहां बाबा कुटिया में रहते सौहार्द व प्रेम का संदेश देने वाले हजरत कुतबे आलम का पवित्र स्थल भी यहीं है। गंगा-यमुना के दोआब में स्थित गंगोह शरीफ की भूमि सूफी-संतों की बदौलत पूरे विश्व को सौहार्द का संदेश दे रही है। कुतबे आलम गंगोही ने यहीं से इंसानियत का संदेश दिया। इनके दरबार से कोई खाली नहीं जाता। हजरत कुतबे आलम ने केवल अध्यात्म का ही संदेश नहीं दिया, बल्कि भाईचारे की शिक्षा भी दी। कोई भी ताकत यहां का सांप्रदायिक सद्भाव तोड़ नहीं सकी। इब्राहीम लोदी, बाबर व हुमायूं जैसे बादशाह भी उनके मुरीद थे और यहां हाजरी भरने आते थे। हजरत कुतबे आलम का मजार भी हुमायूं ने बनवाया था। हजरत कुतबे आलम बचपन से ही धार्मिक थे। शिक्षा व ज्ञान में इनकी बेहद रुचि थी। हजरत मखदूम साबिर कलियरी के जलाल को जमाल में बदलना इनका बड़ा कारनामा था। हजरत ने मखदूम जहां के पास मजार को एक-एक ईंट पर कुरान-ए-पाक दम करके अपने हाथों से बनाया था। हजरत कुतबे आलम का जीवन बेहद सादगी भरा था। अध्यात्म व लेखन में इन्हें बेहद रुचि थी। Dargah Hazrat Qutab e Aalam Gangohi

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