Architectural ruins

PORAS JAT,LOHARKA,BULANDSHAHAR पोरस जाट,लोहरका,बुलन्दशहर.

पोरस जाट,लोहरका,बुलन्दशहर. लोहरका गांव की स्थापना पोरस जाटों ने की थी। लोहरका करीब 1860 - 62 में चौ. गुलाब सिंह जी ने बसाया था। लोहरका जमींदारों का गांव था, चौ. भगवान सिंह जो चौ.गुलाब सिंह जी के पोते थे लोहारखा समेत 8 गांवों के जमींदार थे. चौ. भगवान सिंह के तीन भाई थे। परिवार का सबसे बड़ा व्यक्ति जमींदार बन जाता है और भगवान सिंह के बाद उन्हें जमींदार की उपाधि दी गई, उनके पुत्र चौधरी नवाब सिंह ने जमींदार का पद ग्रहण किया, लेकिन उनकी जल्दी मृत्यु हो गई और उनके बेटे बहुत छोटे थे, इसलिए उनके छोटे भाई जमींदार बन गए। चौधरी नवाब सिंह की सबसे बड़ी बेटी की शादी भरतपुर जाट राज्य के शाही परिवार के कुंवर पृथ्वी सिंह से हुई थी। कुंवर पृथ्वी सिंह भरतपुर के महाराजा किशन सिंह के पोते और राव राजा गिरधारी शरण सिंह और रानी राजवीरी कौर के पुत्र हैं। कुंवर पृथ्वी सिंह वर्तमान में भरतपुर के कोठी गुलजारबाग में रहते हैं। लोहारखा गांव का मुख्य आकर्षण भगवान सिंह और उनके भाइयों की हवेली हैं जो कि सन 1891 में बनी थी । इन हवेलियों को खूबसूरती से उकेरा गया है और ये लोहारी ईंटों से बनी हैं, इसलिए गांव का नाम लोहारखा है। लोहारखा के जाटों के पास विशाल कृषि योग्य भूमि है और इसलिए वे समृद्ध हैं। वे राजा पोरस के वंशज हैं जिन्होंने सिकंदर महान को नाकों चने चबवा दिए थे और सिंधु नदी के किनारे पे 326 BC में सम्राट पोरस ने सिकंदर से युद्ध लडा था | Loharka



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