श्मशान महाकाली मंदिर,सदर बाज़ार,मेरठ.

Oct 8, 2024 - 21:29
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श्मशान महाकाली मंदिर,सदर बाज़ार,मेरठ. मेरठ ,सदर बाज़ार स्थित महाकाली का 450 वर्ष प्राचीन मंदिर . मेरठ में सदर बाज़ार स्थित महाकाली का यह प्राचीन मंदिर अपने आप में बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है। सिद्धपीठ मां काली के मंदिर को कुछ लोग श्मशान महाकाली भी बोलते हैं, क्योंकि ऐसा बताया जाता है कि इस मंदिर की जगह साढ़े चार सौ साल पहले कभी श्मशान हुआ करता था। मंदिर की देखभाल एक बंगाली परिवार करता आ रहा है। मंदिर का इतिहास: सदर बाजार स्थित मां काली देवी का मंदिर 450 वर्ष से ज्यादा पुराना है। बताते हैं कि यहां पहले श्मशान घाट हुआ करता था। तब यहां मां काली की छोटी सी मूर्ति थी। लोग जब भी यहां आते, मूर्ति की भी पूजा-अर्चना करते थे। फिर यहां जो लोग आते, उनकी मनोकामना भी पूरी होने लगी तो धीरे-धीरे भीड़ बढ़ने लगी। कहा जाता है कि मां की पूजा-करने से आसुरी शक्तियां, टोने-टोटके दूर होने लगे तो इस मूर्ति के प्रति लोगों में अटूट श्रद्धा बन गई। करीब डेढ़ सौ साल पहले यहां इस मंदिर की स्थापना हुई। अब यह सिद्धपीठ के रूप में यह मंदिर जाना जाता है और अन्य राज्यों के लोग यहां मां का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। एक बंगाली परिवार शहर में आया तो उन्होंने श्मशान में मां काली की इस मूर्ति को विलक्षण माना। उन्होंने यहां विधि-विधान से मां की पूजा करनी शुरू की। प्रत्येक शनिवार को मां काली देवी को श्रद्धालु चुनरी, शृंगार का सामान और नारियल चढ़ाते हैं और उनके सामने दीपक जलाते हैं। कोई विशेष कामना हो तो यहां धागा भी बांधते हैं और पूजा-अर्चना के बाद रात को दस बजे ढोल-नगाड़ों के साथ होने वाली महाआरती में शामिल होते हैं। मान्यता है कि उन पर मां काली की कृपा होती है। छठे नवरात्र में मां काली की मूर्ति का रूप अन्य दिनों के मुकाबले बड़ा हो जाता है, जो नवमी तक रहता है। उसके बाद मां काली सामान्य हो जाती हैं। वैसे भी सामान्य दिनों में जो मां से सच्चे मन से मांगता है, देवी जरूर पूरी करती हैं। कहते हैं कि जादू, टोने और ऊपरी साये की समस्याएं मां काली देवी के मंदिर में प्रवेश करते ही दूर हो जाती हैं। आलोक कुमार बैनर्जी (कुंदन दादा) जिनकी उम्र लगभग ६५ वर्ष हैं पिछले ४७ वर्षों से माता की सेवा में लीन हैं यहाँ ९ बंगाली परिवार हैं जो क्रमशः माता की सेवा करते हैं । कुंदन दादा बताते हैं की यहाँ मंगल और ब्रहस्पतिवार के दिन को छोड़ कर माता को प्रसन करने के लिए बली भी दी जाती हैं । यहां केवल शहरी नहीं बल्कि बाहरी शहरों से भी भक्त मां के दर्शन करने आते हैं। मंदिर में जिसने भी पूरे विधि विधान से मां का गुणगान किया है और मां की महाआरती में उनका वंदन किया उसकी मनोकामना महाकाली अवश्य पूरी करती हैं। वे कहती हैं कि मंदिर में लोग मां को चुनरी और नारियल भी चढ़ाते हैं। मां अपने भक्तों के कष्टों को हरकर उन्हें सुख, शांति व समृद्धि से आच्छादित करती हैं। दुर्गा मां के नवरात्रों में मंदिर में मां काली का भव्य शृंगार किया जाता है। यह विशेष शृंगार होता है, जिसमें पूरे मनोयोग से पूरी मंडली कार्य करती है। सुबह शृंगार के बाद आरती होती है। इसके साथ ही रोजना रात दस बजे नगाड़ों के साथ महाकाली की स्पेशल आरती की जाती है। इस आरती का अपना विशेष महत्व माना जाता है। सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर मंगल आरती व भंडारा किया जाता है।