मेरठ में 351 साल पुराना ऐतिहासिक नौचंदी मेला.
शहर में नौचंदी मेला आज 351 साल का हो गया है। सन् 1672 में मेले की नौचंदी मेले की शुरुआत शहर स्थित मां नवचंडी के मंदिर से हुई थी। शुरुआत में इसका नाम नवचंडी मेला था, जो बाद में नौचंदी के नाम से जाना गया। नवरात्र के नौवें दिन यहां मेला भरना शुरू हुआ था। धीरे-धीरे मेला बड़ा होता गया और इसका स्वरूप एक दिन से निकल कर दिनों में तब्दील हो गया। मेरठ से शुरू हुए 1857 के विद्रोह के अगले साल 1858 को छोड़कर हर साल मेले का आयोजन होता रहा है। मेले को 2020 में कोरोनावायरस महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था। कहा तो यह भी जाता है कि शहर में जब-जब सांप्रदायिक दंगे हुए तब-तब नौचंदी मेले ने ही हिन्दु-मुस्लिम के दिलों की कड़वाहट दूर की। दंगों के बाद भी दोनों ही पक्ष के लोग नौचंदी मेले में एक साथ देखे गए। शहर में नौचंदी मेला इस वर्ष 351 साल का हो गया है।
इंडो-पाक मुशायरा तो इस मेले की जान हुआ करता था। इंडो-पाक मुशायरे में हिंदुस्तान के साथ पड़ोसी मुल्क के शायरों को भी न्यौता दिया जाता था।
पहले समय में नौचंदी दिन का मेला देहात और रात को शहर का होता था। दिन में दूर-दराज के लोग इस मेले में खरीदारी करने आते थे, जबकि रात होते यहां शहरवासियों का जमावड़ा लग जाता था। पिछले कई सालों में नौचंदी मेले के स्वरूप में आई तब्दीली एक दुख का विषय है,अब नौचंदी मेला बस एक औपचारिकता भर रह गया है। अधिकांश लोग रात में वहां जाना पसंद नहीं करते। अब मेले में सुधार की बहुत गुंजाइश है।
देश के कौने-कौने से व्यापारी आकर यहां भिन्न-भिन्न तरीके के उत्पाद बेचते थे। इससे न केवल शहर के लोगों को अपनी कल्चर का बोध होता था, बल्कि देश के आर्थिक लाभ भी होता था। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान यहां बहुत बड़ा पशु मेला भी लगता था। इस मेले में अरबी घोड़ों का व्यापार किया जाता था। आर्मी अपने घोड़े अधिकांश इस मेले से ही खरीदती थी।
पुराने समय में नौचंदी मेला मेरठ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की शान हुआ करता था। मेले में हिन्दू-मुस्लिम की सहभागिता से शहर का सांप्रदायिक सौहार्द बना रहता था।
मेरठ शहर के बारे में जितना कहा जाए उतना ही कम है, मेरठ एक क्रांति की धरा है, सदियों से अपनी सुंदरता को संजोए हुए हैं। लेकिन कुछ लोग इसकी सुंदरता को धुलित करने का प्रयास कर रहे हैं। स्टूडियो धर्मा ये गुज़ारिश करता है की यदी हम अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपने साथ अपने शहर का भी ख्याल रखे तो इस क्रांतिधरा को और भी खूबसूरत बनाया जा सकता है।
Nauchandi Ground