Religious Marvels

AMBEY MAA,MATA AMBIKA,JAIN TEMPLE, HASTINAPUR,MEERUT

अम्बिका माता (माँ अम्बे)का मंदिर,श्री दिगम्बर जैन प्राचीन बड़ा मन्दिर,हस्तिनापुर मुख्य मंदिर के बांयी ओर हैं माँ अम्बे का मन्दिर जहाँ विराजमान हैं माता अम्बिका देवी,यह अत्यंत प्राचीन मूर्ती 1979 में नहर की खुदाई से प्राप्त हुई थी।जिस दिन से ही माँ अम्बे यहाँ प्रकट हुई है तभी से छेत्र पर विकास कार्य निरंतर प्रगति की ओर चल रहा है । अत्यंत चमत्कारी हैं यह देवी,ऐसी मान्यता हैं माँ अम्बे से सच्चे मन से जो कोई भी कुछ भी माँगता हैं उसकी मनोकामना ज़रूर पूरी होती हैं । जैन धर्म के अनुसार अम्बिका देवी (माँ अम्बे) एक रक्षक देवी है। अम्बे माँ को अक्सर एक या अधिक बच्चों के साथ और अक्सर एक पेड़ के नीचे दिखाया जाता है। उन्हें अक्सर शीर्ष पर एक छोटी तीर्थंकर नेमीनाथ जी की छवि के साथ तथा एक जोड़ी (दाईं ओर यक्ष सर्वानुभूति और दाईं ओर कुष्माण्डिनी) के रूप में दर्शाया जाता है। अंबिका नाम का शाब्दिक अर्थ है माता । जैन पाठ के अनुसार, देवी अंबिका के बारे में कहा जाता है कि वह एक साधारण महिला थी जिसका नाम अग्निला था जो देवी बन गई थी। वह अपने पति सोमसमरन और अपने दो बच्चों शुभानकर और प्रभाकर के साथ गिरिनगर (गिरनार जी )में रहती थी। एक दिन, सोमसमरन ने ब्राह्मणों को श्राद्ध करने के लिए आमंत्रित किया और घर पर अग्निला को छोड़ दिया। तभी भगवान नेमिनाथ के मुख्य शिष्य “वरदत्त”वहाँ से गुजर रहे थे और उन्होंने अग्निला से उनका महीने भर का उपवास समाप्त करने के लिए भोजन मांगा जो अग्निला ने उन्हें प्रदान किया ।जब सोमासर्मन और अन्य ब्रहमनो को यह बात पता चली तो वह उन पर भड़क पड़े क्योंकि वे भोजन को अब अपवित्र मानते थे। सोमासमरन ने अपने बच्चों के साथ उन्हें घर से निकाल दिया; वह एक पहाड़ी पर गई जहाँ उन्होंने भगवान नेमीनाथ की तपस्या की । उन्हें अपने गुणों के लिए देवता द्वारा शक्ति प्रदान की गई थी, वह जिस पेड़ के नीचे बैठी थी वह कल्पवृक्ष बन गया था, इच्छा-अनुदान देने वाला पेड़, देवता अंगिला के साथ व्यवहार पर क्रोधित थे और उन्होंने समस्त गाँव को नष्ट करने का फैसला करलिया था ।गाँव में आपदा आगई यह देखने के बाद सोमसर्मन और ब्राह्मणों ने महसूस किया कि यह सब अग्निला के साथ दुरव्यवहार के कारण हो रहा हैं और वह देवता से क्षमा मांगने के लिए मंदिर पहुँच गए।अपने पति को सजा मिलने से डरते हुए देखकर, अंगिला ने चट्टान से कूदकर आत्महत्या कर ली, लेकिन तुरंत देवी अंबिका के रूप में पुनर्जन्म ले लिया। उनके पति का शेर के रूप में पुनर्जन्म हुआ और वह उनके पास आया, उनके पैरों को चाटा और उनका वाहन बन गया। अम्बिका देवी भगवान नेमीनाथ की यक्षी बन गई। माँ अंबिका की उपासना बहुत पुरानी है, भारत में उनके कई चित्र और मंदिर हैं। देवी अंबिका को सम्मानित देवताओं के रूप में रखा जाता है और तीर्थंकरों के साथ पूजा की जाती है। माता अम्बिका को तांत्रिक अनुष्ठानों से भी जोड़ा जाता हैं । इन तांत्रिक संस्कारों में यन्त्र-विधी, पित-स्थापन और मन्त्र-पूजा शामिल है। माता अम्बिका को कल्पलता भी कहा जाता है और कामना देवी को पूरा करने वाली देवी। माता अंबिका को प्रसव और समृद्धि से भी जोड़ा जाता हैं हैं।माता अंबिका को कुलदेवी या गोत्र-देवी के रूप में भी पूजा जाता है।माता अम्बिका जैन समुदाय की कुल-देवी है।

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